आँसू

यूँ तेरा दर्द,आँखों से निकल जाता हैं।
ये तो आँसू हैं,जो दिल सम्भल जाता हैं।

अब तो हमें,ये ख़याल भी नहीं रहता;
कौन रहता हैं यहाँ,कौन निकल जाता हैं।

यूँ तेरे बदलनें से तकलीफ़ तो होगी;
मग़र जिसे बदलना है,वो बदल जाता हैं।

आज भी'इत्तेफ़ाकन, हमदोनो मिलतें हैं;
ख़्वाब जितने हैं,सब मचल जाता हैं।

बाज़ार रिस्तो का,लाख सजा लो लेकिन;
सिर्फ साथ रहने से,न दिल बहल जाता हैं।

ईश्क़ में ख़ुदा,इतने हौसले दे देता हैं;
पथ्थर की राह में,होकर कमल जाता हैं।

दिल की साहेब,मजबूरी भी तो देखिए;
ख़्याल करता है उसकी,जो छल जाता हैं।

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