शहर
अभी तो आया हुँ यहाँ,ये रहगुज़र छोड़ दूँगा मैं।
इरादों से थक जाऊँगा,तो'तेरा शहर छोड़ दूँगा मैं।
ये विरासत रही है मेरी,मैं गुमनाम हो नहीं सकता;
तेरे नकारने से पहलें,अपनी ख़बर छोड़ दूँगा मैं।
आजाद शायर से पिता,नौकरी की उम्मीद करते हैं;
मुझको अगर न समझें,तो'अबकी घर छोड़ दूँगा मैं।
यूँ तो मेरी गजलों की यहाँ,हो गयी दुनियाँ मुरीद हैं;
मग़र तुझें जब लिखना चाहुँगा,बहर छोड़ दूँगा मैं।
मेरे हालात जो भी हो,तुम मुझकों आवाज़ तो'देना;
किसी भी ऊँचाई पे रहूँगा,तो'वो दहर छोड़ दूँगा मैं।
अभी तो आई हो,संग मेरे कुछ वक्त गुज़ारों भला;
सुबह गुजर भी जाएगी,तो'तुझें दोपहर छोड़ दूंगा मैं।
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