जिम्मेदारी
तुम क्या जानोंगे,दुश्वारियों तक आ जाना।
उम्र से पहले,जिम्मेदारियों तक आ जाना।
हाथ खाली हो,घर के चूल्हें उदास पड़ें हो;
बेटी का पिता की,दाढ़ीयों तक आ जाना।
हज़ार मन्नतों के बाद,कमाई गिरवी रखकर;
बेटी सौंप,घर की किवारियों तक आ जाना।
कलेज़ा निकाल कर,ग़ैर की चौखट रखा हैं;
आसाँ नहीं,सलवार का साड़ियों तक आ जाना।
घर की रौनक,जो पिता का गुमान थी कभी;
खबर उसकी,अपनी जबारीयों तक आ जाना।
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