बेशऊर
हर इक नादानीयाँ,कोई ख़ता नहीं होती।
बेशऊर होती हैं लड़कियाँ,बेवफा नहीं होती।
हर छोटी बात पर,ये सीने से लिपट जाती हैं;
फूल को रौंदे ऐसी कभी,तितलियाँ नहीं होती।
अल्लर उम्र में अक्सर,गलतियाँ हो ही जाती हैं;
जिन चिड़ियों को,घोसलें का पता नहीं होती।
हर अहसास को खुद में,ताउम्र समेटें रखती हैं,
दो हजार ग़म,इनके दर्द की इंतहा नहीं होती।
चंद मीठी बातों से ही अक्सर,ये बहल जाती हैं;
इनके बग़ैर,गुलजार' कोई बागबाँ नहीं होती।
बावफ़ा दिल अगर आ भी जाए,तो'कौन सुनेगा;
क़ैद परिंदों की साहेब' कोई इल्तज़ा नहीं होती।
पहले दिल को समझिए,तब दिल में उतरीएगा;
राह जो दिखती हैं आसाँ,वो आसाँ नहीं होती।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें