शेर
नदी लड़कर जब किसी तुफान से निकलें।
शेर बड़ा वो है,जो गमों के उफ़ान से निकलें।
महबुब की बातों पे भला,यूँ खुश क्या होना;
जो भी उजरें हैं,मोहब्बत की दुकान से निकलें।
चंद दोस्त हमनें,किसी उम्र में बनाए थे कभी;
कुछ आस्तीन मेरे भी,यहाँ मकान से निकलें।
जब मिलूँ तुमसें,बस इतनी ख़्वाईश रखता हुँ;
तु सर झुकाकर और हम,बड़ी शान से निकलें।
हमनें बीबी से सहेली का,नंबर क्या माँगा;
वो ऐसे बरसें,जैसे खतरें के निशान से निकलें
आदमी वो है,जो रोतें हुए को हँसा दें साहेब;
क्या मतलब,आप किस खानदान से निकलें।
भाई तब यहाँ भाई, यक़ीनन रह नहीं जाता;
हाथ उसके आपकी,अगर गिरेबान से निकलें।
ज़मीं के लोग ही,जमानें की किस्मत बदलतें हैं;
हौसलें थोड़े न है यहाँ, आसमान से निकलें।
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