मतलब
मतलब नहीं है कोई,मतलब निकाल लेंगे।
निष्ठुर हैं यहाँ के लोग,क़ीमत निकाल लेंगे।
तुमसें अपने रिश्तें का,हज़ार वास्ता देकर;
देखना इक दिन,तेरी नेमत निकाल लेंगे।
इरादा भाँपकर यहाँ,अब किसी से मिलना;
जो हैं शरीफों में,वो शराफ़त निकाल लेंगे।
ये सियासी लोग हैं,इन्हें सब आता है हुनर;
हर हाल में,झूठ बोलने की हिम्मत निकाल लेंगे।
कौन जी रहा हैं यहाँ,कौन मर रहा है यहाँ;
मौका देख कुछ लोग,सियासत निकाल लेंगे।
अभी साँस बाक़ी हो,तो'इतना तो बताओ;
क्या हम पैसे से ही,हर जरूरत निकाल लेंगे।
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