तलाश

 किसी सुकूँ की तलाश में हैं,बदहवास पड़ा हैं।

तेरे इंतजार में मेरा शहर,आज भी'उदास पड़ा हैं।


हैं उम्मीद उसको भी,तुम आओगी इक दिन;

जहाँ तेरी बचपन का हर इक,एहसास पड़ा हैं।


तेरे शौहर तुझें चाहेंगे,मग़र मुरीद नहीं रहें होंगे;

यहाँ तेरी एक झलक को,हर आमों-ख़ास पड़ा हैं।


तेरी राह तकतें थे,ये हाल उन लड़कों का हुआ;

बस स्टैंड खाली है,पॉकेट में बस का पास पड़ा हैं।


तेरे न आने से फूलों का,बहुत नुकसान हुआ हैं;

रोज खिलती है,आशिकों का अवकाश पड़ा हैं।


हाल हम अपना क्या तुझको,अब बताए सनम,

सागर होकर भी मुझकों,लहरों का तलाश पड़ा हैं।

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