हार

 इससे पहले की, मैं तुझसें हार जाऊँगा।

तेरे आँखों में,इक समंदर उतार जाऊँगा।


ऐ मेरे दोस्तों,मुझकों जरा ख़ूब सजाओ;

उनकी महफ़िल में,होकर तैयार जाऊँगा।


इक अदद आदतें हैं मेरी,जो बदलेगी नहीं,

तेरी गली से निकलूँगा,तुझें पुकार जाऊँगा।


कहीं शहनाई गूजेंगी,कहीं मातम पसरेगा;

बस तुम खुश रहों,मैं सब स्वीकार जाऊंगा।

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