तुफान

ये आया यहाँ कोई,तुफ़ान सा लगता हैं।
 शहर में हर कोई,परेशान सा लगता हैं।

जिंदगी ख़ुद अपना, मातम मना रहीं हैं; 
ये डर नया है, घर श्मशान सा लगता हैं।
 
हम तो शायर है, हर बात को लिखतें है; 
मौत भी महफ़िल में,हैरान सा लगता हैं।

देखिए ज़रा उनको यहाँ,बारीक नज़रों से;
हर बच्चा कल का,निगेहबान सा लगता हैं।

यहाँ क्या हमारा है, यहाँ क्या तुम्हारा हैं; 
फैसला हो जाए,तो'आसान सा लगता हैं।

ईश्क़ की फसल को,इसी मौसम काटेगा;
आशिक़ नहीं,बेबस किसान सा लगता हैं।

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