आभारी
दिल मेरा, उसका आभारी भी हैं।
और उसी से,दिल की बीमारी भी हैं।
उम्रभर बुजुर्गों की,जो मनाही रही है;
हमें उसी राह,जाने की तैयारी भी हैं।
अभी प्यार ठीक से,हुआ भी नहीं हैं;
दिन मुश्किल हुआ,रात भारी भी हैं।
किस्मत वही जाकर,बदलनी भी हैं;
जहाँ किस्मत के,बैठें शिकारी भी हैं।
हमारी सादगी का,ये आलम रहा हैं;
दुश्मनों से करते रहें,रायशुमारी भी हैं।
उसपर प्यार आना भी,मुनासिब हैं;
लड़की सुंदर भी हैं,और कुँवारी भी हैं।
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