लड़की

मेरे बुरे दौड़ का,अच्छा ख़्याल थी वो लड़की।

बड़ी आँखें,भड़ा बदन कमाल थी वो लड़की।


बाजार कितना खुलेगा,आज वो आएगी की नहीं;

सबकी नजर का बस वही,सवाल थी वो लड़की।


हसरतें हज़ार थी,हासिल भी हमें लाख़ हुआ;

मग़र उम्रभर की कसक, मलाल थी वो लड़की।


सादगी,हुनर मिलाओ,फिर'उसपर हुस्न सजाओं,

ईश्वर की कारींदगी की,मिशाल थी वो लड़की।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान