मोहब्बत

अंजुरी भर मुस्कान लिए,जब'

हो एक,दो निग़ाह'मोहब्बत हैं।


लाचारी में भी ख़ुद से ज्यादा,

करना उसकी परवाह,मोहब्बत हैं।


उजालें को और उजाला देकर,

ख़ुद हो जाना स्याह,मोहब्बत हैं।


हो इक ही गलती,सौ बार अगर,

लाख करें कोई आगाह,मोहब्बत हैं।


घर की जिम्मेदारी,उठाने वाला,

होने लगें ग़र बेपरवाह,मोहब्बत हैं।


चुल्लू भर पानी मे रहकर,देना'

यहाँ समंदर की थाह,मोहब्बत हैं।

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