दिल की बात
ख़ैर छोड़िए, दिल की बात'कहाँ तक जाएगी।
आप ही बर्बाद होंगे,वो लड़की मुस्करा कर जाएगी।
वक़्त को समझिए,खुद को ख़ूब निखारिए यहाँ;
वर्ना जिंदगी एक दिन,तुझें ठेंगा दिखा कर जाएगी।
कोई उम्रभर यहाँ,ज़नाब'अब साथ निभाता नहीं;
ये साथ रहने की ज़िद,और फासला बढ़ाकर जाएगी।
फूल जो कभी,यहाँ अपनी माली का हैं हुआ नहीं;
भौरें ये सोचते है के सबका,दिल बहलाकर जाएगी।
ये जो कश-म-कश हैं, तुझकों कहीं का न छोड़ेगी;
तुझकों अकेला छोड़कर,वो कारवाँ बढ़ाकर जाएगी।
औऱ कुछ न हो,मग़र ये ईश्क़ में' मुमकिन हैं यहाँ;
अगर करोगें ईश्क़,तो'ये तुमकों आज़माकर जाएगी।
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