मन
बिना दिल में उतरें,कुछ भी'अर्पण नहीं होता।
दिखा दें झूठ को सच,वो कतई दर्पण नहीं होता।
लेकर गोद में कोई,प्यार से'बालों में उंगलीयाँ फेरें;
भले कह न पाए,मग़र'ये किसका मन नहीं होता।
तुम मेरे दर्द को समझों,हम भी तेरे दर्द को समझें;
ईश्क़ ये भी है,सिर्फ़ मिलने से,प्रेम पावन नहीं होता।
बस पूछना इतना था,मोहब्बत के तंग तहजीबों से;
हो ब्यथित हृदय,तो'अश्रुजल से आचमन नहीं होता।
जो विरह की वेदना में,हो बहुत तल्लीन बैठें है;
सिर्फ़ मौसम बदलने से,उनका सावन नहीं होता।
भलें हो खिलखिलाती धूप,या बरसात का मौसम;
बग़ैर उनके जी नहीं लगता,अच्छा मन नहीं होता।
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