कमाल
जब भी उसको मेरा ख़्याल आएगा।
मुझें मालूम हैं,ईश्क़ कमाल आएगा।
भलें वो आज बच जाए,मेरे सवालों से;
कल हम हीं को ढूंढेगा,मलाल आएगा।
पहाड़ों की गोद में ही,नदी बसती हैं;
लाख़ परखेगा,होकर निढाल आएगा।
जुदाई की बेला हैं,आज दिल छलनी हैं;
मग़र'मेरे हिस्सें भी,अच्छा साल आएगा।
यूँ कहीं जाएगी,हमदोनों की कहानीयाँ;
ईश्क़ में जब भी,बेहतर मिशाल आएगा।
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