गवाही

मेरी शोख़ी,मेरी मस्ती,मेरी उड़ान ले लेगा।
इतना चाहता हैं की, तू मेरी जान ले लेगा।

वक़ालत ईश्क़ में तेरी,यहाँ काम न आएगी;
महबूब जो चाहेगा तुमसें,वो बयान ले लेगा।

ईश्क़ हुआ,तो'बिमारियाँ कुछ कर नहीं पायेंगी;
ईश्क़ ख़ुदा से भी,जंग सीना तान ले लेगा।

यूँ तो उतरेगा दिल में,ये साहेब'बहुत धीरे से;
शोर मचाएगा ऐसा की,तेरी पहचान ले लेगा।

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