पीतल

अपने प्रेम की ठंडी से,सनम'तुझकों शीतल कर दूँगा।

सोने को भी ये डर हैं,के मैं उसको पीतल कर दूँगा।


प्रपंचों की इस दुनीयाँ में,ग़र तुमको गंगा होना हैं;

तो'मैं अश्रुजल से धोकर,तुमकों निर्मल कर दूँगा।


जिनको भी ये खुशफ़हमी हैं,के तुम मेरे अब रहें नहीं;

दिल को जब दिखाऊंगा,तो'सबको पागल कर दूँगा।


नङ्गी है तहज़ीब जहाँ की,तुम्हीं बताओ गंदा क्या हैं;

जिश्मों की इस संधी में ना,मैं मन को ओझल कर दूँगा।


माना मैं हुँ बूंद सही,यहाँ मेरा कोई वजूद नहीं;

तुमसें जब मैं जुड़ जाऊँगा,तो'तुमकों बादल कर दूँगा।

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