सवाल

सवाल

बहुत खुली नहीं ज़िंदगी, बहुत से सवाल हैं।
मगर यकीन करना, तुमसे मोहब्बत कमाल है।

अब इस मोड़ पर अलग हुए तो कुछ न बचेगा;
साथ हुए तो हम सर्प हैं, तू नाज़ुक चंदन की डाल।

ख़्वाइश थी मेरी फिक्र में, कोई खुद को तबाह करें;
तू कहीं तबाह न हो जाए — अब ये डर है, मलाल है।

यकीनन बहुत टूटकर अक्सर चाहती हैं लड़कियाँ;
कोई उन्हें रुसवा करे,तो"कातिल है, चंडाल है।

हम ज़माने के हिसाब से,सनम कभी चलें ही नहीं;
कलम है मेरा सहारा,मेरे शब्द अब मेरी ढाल है।

अब ये न कहना कि मेरा ख़्याल तुम रखते नहीं;
मर गए होते अगर,कभी तुमसे हुए जो बेख़याल हैं।

कितनी राधाएँ विरह में रहीं, और कृष्ण बंजारे रहे;
इश्क़ वो बताते हैं हमें, जिनकी खुदगर्जी मिसाल है।

काट रहा हुं ज़िंदगी, मैं होकर बेमज़ा बेस्वाद-सी;
 कह रही हो,के तुम रुको,बाकी अभी छह साल हैं।

माना तुम ग़र जज हो भी गए,तो"हम क्या करेंगे;
इश्क़ का दायरा तो बस चंद बच्चे और रोटी-दाल है।

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