चाहत

 लिपटकर डाल सी बृक्ष का,होना चाहती हुँ।

उठा लें बाहँ में मुझकों,मैं सोना चाहती हुँ।


बहुत आए बहुत गए,तेरे यादों के मंज़र;

तु गर मेरा हो जाए,तो'मैं तेरा होना चाहती हुँ।


पिघलकर बूंद बन जाऊँ,या कोई दरिया सा;

तूने इतना परखा दिल को,के मैं रोना चाहती हुँ।


उम्रभर साथ रहें,मेरा हर पल दिल बहलाए;

बहुत बेशकीमती नहीं,मैं जिंदा खिलौना चाहती हुँ।


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