यादें
अपने दर्द को,यहां बातों से छलना होगा।
इस तरह तेरी यादों से,मुझे निकलना होगा।
आदतें,हसरतें,जरूरते,सब छोड़ दिए हैं मैंने;
तुम्हीं बताओ मुझें,और कितना बदलना होगा।
बहुत दूर निकल आए हैं,तुझें मंजिल मानकर;
अब लौटना,खाली हाथ घर को चलना होगा।
इतने जरूरी हो तुम मेरे लिए,तुम्हें अब खोना"
किसी उगते सूरज का,बेवक्त सा ढलना होगा।
एक इंतजार,इक सबब,तुम थी जीने का मक़सद;
तेरे बाद अब कहां,फोन की घंटियों पे उछलना होगा।
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