तितलियां
कुछ तो समझा करो सनम,मेरे दिल को
बेतार होकर,तो"घर में बिजलिया नही आती।
जबसे देखा है उस माली के हाथ में खंजर;
अब उस बाग में,साहेब"तितलियां नहीं आती।
सिर्फ हलचल देखकर,न फेंका करो जाल;
सांप भी होते हैं,सिर्फ मछलियां नहीं आती।
इरादा इश्क का हो तो,यूं रूठा न करो सनम;
आम के पेड़ के पर,साहेब"इमलियाँ नहीं आती।
इंसानियत इस कदर,अब मर चुकी हैं यहां
अमीर खिरकियों से,इक भी गुठलिया नहीं आती।
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