लोग

 तेरे सफर में तुम्हे मिले है खूब शयाने लोग।

तुम्हे देखने को,लगे है यहां आने जाने लोग।


हमारा वास्ता सनम,हो तो"यहां इस तरह हो;

हमारा चश्मा ढूंढे,अक्सर तेरे सिरहाने लोग।


सच की यहां हालत ये हैं की,क्या बताए साहेब;

बयां करते ही लगते हैं अब घर जलाने लोग।


उन्हें बचाकर रखिए,जो खानदानी हकीकत हैं;

तुम्हारी असलियत है,जो घर में है पुराने लोग।


अगर हो दिल खेलना,तो"कोई बात नहीं हैं;

होगा जब इश्क तो लगेंगे,आंखे दिखाने लोग।


मैं मजबूर हु,अब वो बड़ी लाचार सी रहती हैं;

अब दिल को लगे है,यहां दुनियादारी बताने लोग।

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