हाल

वो जब भी दिल का,साहेब" हाल पूछता हैं।

लगता है कोई केमिस्ट्री का,सवाल पूछता हैं।


 दर्द सारा इतने से ही,मेरा मिट जाता हैं;

जो भी पूछता है तो इतना,कमाल पूछता है।


बिना उसके रहता,कुछ भी ठीक नहीं हैं।

मगर बड़ी नादानी से,वो बे_मिशाल पूछता हैं।


किसी रोज मिलकर,उसे सब कह देना हैं;

हाल तुम्ही से है फिर क्यू साल दर साल पूछता हैं।


और मोहब्बत को इतनी समझती हैं दुनिया;

मसला इश्क में सिर्फ रोटी दाल पूछता हैं।

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