शूल

 जीवन में जितने भी शूल मिलें।

हमने ये समझा,सारे फूल मिलें।


तुम तो बहारों की मल्लिका हो;

हम ही थे,किच सने,धूल मिलें।


मैने देखा हैं तंगी में,बदहाली में;

जो भी लोग थे,यहां उसूल मिलें।


यूं तो उन्हें,हमसे खूब मोहब्बत थी;

मगर हमेशा खफा मिलें,मशगूल मिलें।


जो थे हर लहज़े में,प्यार जताने वालें;

अक्सर उन्ही से दगा मिलें,शूल मिलें।

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