उफनती नहीं हैं।
बस इसी बात पे,मेरी उनसे ठनती नहीं हैं।
रईशी गंभीर होती हैं,हर बात पे"उफनती नहीं हैं।
तुम्हें क्या बयां करेंगे,यहां तेरे भला चाहनेवालें;
दिल को पिघलाना परता हैं,शायरी यूं बनती नहीं हैं।
मैनें तेरे बाद फिर कोई,उमरता सावन नहीं देखा;
होली में घर आतें नहीं,दीवाली घर मेरे मनती नहीं हैं।
उसे देखकर,सब्र करना भी"यहां बेवकूफी होगी;,
और अफ़सोस हैं,के बेसब्री मेरी वो जानती नहीं हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें