तिल

 उसकी पांव पर तो"नज़र,सलिकें से टिकती ही नहीं;

नज़ीर होगा जो उम्रभर,उसे देखनें के काबिल होगा।


दुनियां की सारी खूबसूरती,तुम करीनें से समेटों;तो"

वो भी मेरे महबूब के,गाल का इक छोटा तिल होगा।


दावा हैं,चांद देखने को"उसे ही गगन में आता होगा;

यकीनन"गुरुर सितारों का भी टूटा,बमुश्किल होगा।


उसे और कुछ पाने की भला,अब जरूरत क्या हैं:

तू जिसकी बाहों में होगा,जिसका मुस्तकबिल होगा।


कोई सागर होगा भी तो तेरी आंखों में,डूबना चाहेगा;

वादियों का भी" तुझे देखकर,बहकता दिल होगा।

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