शान

 तमाम उम्र नुकसान में रहें।

रुतबा नहीं घटा,शान में रहें।


पैरवियों की उन्हें ही जरूरत हैं;

जो पढ़े लिखे,रौशनदान में रहें।


जो हीरा है हीरा ही बनता हैं;

चाहें वो कोयलें की खान में रहें।


भले लाख जख्म दो,कोई बात नहीं;

कभी तेरे अपने थे हम,ध्यान में रहें।


वो आँखिर में,गिर गए,खत्म हो गए;

  ताउम्र जो यहां आसमान में रहें।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान