गुमसुम

 कलेजा मुंह तलक आ जाएगा,जो गुमसुम नज़र आओगी।

मेरी शायरियाें को गौर से पढ़ना, इसमें तुम नजर आओगी।


यूं तो कयामत लगती हो तुम,सर से लेकर पांव तक;मगर"

आंखों में गर काजल लगा लों,तो"बहुत मासूम नज़र आओगी।


कोई बयां करें तुम्हें शब्दों में,यकीनन ग़ज़ल बन जाओगी;

बेसुरा भी जो तुम्हें गुनगुनाना बैठें,तो"तरन्नुम नज़र आओगी।


माथें पे बिंदी,कानों में झुमका,जो मांग में सिंदूर हो मेरा;

जमाना रश्क करेगा,देखकर"जो तेरी तबस्सूम नजर आओगी।

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