ठगा गया हूं

 नैन भींगे आँसुओं के,कतार से ठगा गया हुँ।

मत मिलों मुझें प्यार से,प्यार से ठगा गया हुँ।


भाव से प्रभाव से,तो'कभी कवि स्वभाव से

कभी किसी लगाव से,ऐतबार से ठगा गया हुँ।


नयन भरें ख़्वाब से,तो'कभी किसी गुलाब से,

भाई के स्नेह से,कभी घर-बार से ठगा गया हुँ।


फूल तो कबूल हैं,मग़र'बस की यहीं मैंने भूल हैं;

फूल की तलाश में,मैं यहाँ ख़ार से ठगा गया हुँ।

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