चराग

 जो चराग जलने थे, यकीनन जल गए होंगे।

हम अबतक,तो"उनके दिल से निकल गए होंगे।


हमको बदलना होता,तो फिर"लौटकर नहीं आता;

मगर जिन्हें परहेज था बदलने से,बदल गए होंगे।


ये तो मालूम था,तुम फिर कहां मिलोगें उसी जगह;

एग्जाम निकल गया,तो"क्लास से भी निकल गए होंगे।


खुशबू जब तलक रहीं होगी,खूब सीने से लगाया होगा;

बोझिल होते यकीनन तुम"फूल को भी मसल गए होंगे।

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