आधा क्या।

 हममें तुम हो,तुममें हम हैं,हमदोनों में आधा क्या।

राधा बिन कृष्ण नहीं हैं,कृष्ण बिना भला राधा क्या।


स्नेह का कोई रूप नहीं हैं,विरह से बड़ी न वेदना,;

प्रेम में अगर देह नहीं हैं,फिर"प्रेम में हैं बाधा क्या।


तुमने उसको देखा हैं,माना सर से लेकर पांव तक;

अगर मन को नहीं देखा,तो"तुमने आख़िर साधा क्या।


देने में अब उलझन कैसी,जब प्रेम से हमें थामा हैं;

प्रभु से जब मांगें कोई,कम क्या हैं और ज्यादा क्या।

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