अंगीठी

 तुम्हें अपने दर्द का तो पता है प्रियें;

तुम क्या जानों,मुझपे"क्या बीती हैं।


उम्रभर आग से,लगता"डर था हमें;

आज पूरा जीवन हुआ,मेरा अंगीठी हैं।


मैं सीधा सादा बेचारा,इतना समझा नहीं;

अब मोहब्बत में चलती,राजनीति हैं।


सुनी आंखो को,हज़ार ख्वाब दिखाकर;

ख्वाब तोड़ते हो,कहते हो"कूटनीति हैं।


हमनें सुना था प्यार,राधा कृष्ण जैसा;

रोज जो बदल जाए,वो कैसी प्रीति हैं।

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