समतल
शबनम की चोट से,घायल लगती हैं।
वो लड़की इश्क़ में,पागल लगती हैं।
जवानी अक्सर,उसी मोड़ पर"फिसलती हैं;
जहां की राह बिल्कुल,समतल लगती हैं।
पपिहा,मोर,कोयल के सुर से भी मधुर;
यहां बजती हुई उसकी,पायल लगती हैं।
ऐसे रहती वो पास,अब नहीं हैं मेरे;मगर"
अहसासें_दिल वो,अक्सर पल पल लगती हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें