कलक्टरी
तुम्हारी कलक्तरी तुमको,मुबारक हो साहिबा;
हमें तो तुम्हें दिल की,सनम"रानी बनाना था।
ओहदा तो उम्र रहते ही,खत्म हो जाना हैं;
हमें मोहब्बत की खूबसूरत,कहानी बनाना था।
इक सदी तक याद रखें जाए,यहां हमदोनों;
कोई किस्सा ऐसा सनम,मुंहजबानी बनाना था।
मिलकर शराब में,शराब का ही हो जाता हैं।
सनम हमें इक दूजे से ऐसा,पानी बनाना था।
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