अजान

 माना खुदा ने ही यहां,बनाया होगा तुमको;

मगर अब खुदा भी तेरी,अज़ान ले सकता हैं।


और तुझे कटार की,भला जरूरत क्या हैं;

तू मुस्करा कर भी,किसी की जान ले सकता हैं।


8 सालों की मोहब्बत पे,तुझे यकीन न रहा;तो"

दिल में खंजर घुसाकर भी,इम्तिहान ले सकता हैं।


आज उसने मांगी हैं मुझसें,चंद लम्हें कुछ पल;

जो चाहता,तो"मेरी सारी, उनवान ले सकता हैं।


जिसने खोया हैं तुम्हें,उसे खोने का डर क्या होगा;

इससे ज्यादा भी भला क्या,भगवान ले सकता हैं।


जो देख_रेख में रहें खूब,उनकी भी इज्जत चली गई ;

तुम्हें मालूम ही नहीं कितना,निगेहबान ले सकता हैं।

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