इश्क़

हमारा तो तीसरा हैं,क्या तुम्हारा पहला इश्क़ हैं।

हो रहे हो अधीर तुम,बहुत गूढ़ मसला इश्क़ हैं।


तुमको कहीं का न छोड़ेगी,फिर तेरा पता पूछेगी;

समझ रहे थे नादानी जिसको,ये पगला इश्क़ हैं।


बस स्टॉप से 4 कदम चलकर हैं जो चौथी गली;

वहीं लड़कियों का हॉस्टल हैं,मोर अगला इश्क़ हैं।


और न छूरी,न खंज़र,ना ही इसमें कोई कैद हैं;

भावनाओं से खेलकर,किसी से"लेना बदला इश्क़ हैं।


थे बड़े चालाक लोग,जो बस कौड़ियों में बिक गए;

तुम ग़र हो नहला,तो"यहां नहलें पे दहला इश्क़ हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान