तमन्ना
होती अम्बर में तू,तो"चांद कोई,रत्नों में तो तू पन्ना हैं।
अब कैसे तुझें समझाऊं के,देखने की तुम्हें तमन्ना हैं।
होती फूलों में तो गुलाब कोई,मौसम में हो सावन तुम।
शहरों में होती कश्मीर,होती नदियों में गंगा पावन तुम।
तेरे होने से"फकीरी मिट जाए,न तुमसा कोई धन्ना हैं।
अब कैसे तुझें समझाऊं के,देखने की तुम्हें तमन्ना हैं।
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