फ़रवरी

 इश्क़ में फिर कई,इम्तिहान लेगी फ़रवरी।

फ़िर से कई गुलाबों की,ज़ान लेगी फ़रवरी।


इशारों में कहों,मोहब्बत इशारों का भाव हैं;

दूर से ही आशिकों को,पहचान लेगी फ़रवरी।


कई नन्हीं उम्र को,ये हसीन ख़्वाब देगी;

कितने पुरानें उम्र का,उन्वान लेगी फ़रवरी।


तुम अब तलक क्या,गुलाबों पे ही अटकें हो;

हम इस तरह मिलेंगे,के उन्हें जान लेगी फ़रवरी।

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