डिग्रियां
बरबस न किसी के,आंखों को रूला दीजिए।
प्रेम न समझ आए,तो"डिग्रियां जला दीजिए।
किसी की इक उम्र लेकर,चंद लोग यूं कहते हैं;
बहुत हुआ जाइए,आप हमको भुला दीजिए।
भरोसा आपको करना हैं,ये जरूरत आपकी हैं;
हमनें इश्क़ कर लिया,अहसान ये चुका दीजिए।
खोखलें हैं जो उसूलों से,और यहां दिल से भी;
शिक़ायत वही करेंगे की,इश्क़ का सिला दीजिए।
इश्क़ अगर जुर्म हैं,तो"हम तैयार है जो कहिए;
जान ये ले लीजिए,हमें जहर कोई चटा दीजिए।
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