संयोग

 प्रेम स्नेह बंधन हैं,प्रेम निश्चल भावों का योग हैं।

माना प्रेम में पीड़ा हैं,मगर"मिलना प्रेम संयोग हैं।


प्रेम में हैं वो जीवनरस,जो प्रेम पिए मतवाला हैं।

प्रेम बिना समझो जीवन,जैसे खाली प्याला हैं।

मन पावन तो प्रेम गंगा हैं,हो कुंठित तो रोग हैं।

माना प्रेम में पीड़ा हैं,मगर"मिलना प्रेम संयोग हैं।


[हो प्रेम तो हो मीरा सा,या हो राधा की पीड़ा सा;

तुम भावों में उतरों तो"यहां कौन नहीं हैं हीरा सा;

मन भावे तो देह ईश्वर हैं,नहीं तो"देह बस भोग हैं।

माना प्रेम में पीड़ा हैं,मग़र"मिलना प्रेम संयोग हैं।

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