सिर्फ़ तुम्हीं थे।

 तुम्हीं थे,हां तुम्हीं थे,सिर्फ़ तुम्हीं थे।

बाकी सारे रिश्तें,सनम"मौसमी थे।


किस तरह बयां करें,बस ऐसे समझो;

तुम ख़ुदा थे,और सब बस आदमी थे।


जहां उपज सकते थे,मरे अरमां भी;

तुम चांद थे,ख़्वाब थे,खुशनुमा जमीं थे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान