बुजदिल

 जो हर मोर पर कुचला जाए,

ऐसा मेरा दिल नहीं ठहरा।


मगर मोहब्बत से हार भी जाए,

मैं इतना बुजदिल नहीं ठहरा।


हुनर खा गई मेरा,मुझी से कहती हैं;

तू अब उतना,काबिल नहीं ठहरा।


मुद्दत हुई उनसे,मिलकर कुछ कहें;

मिलें भी,तो"वो संगदिल नहीं ठहरा।


वो चेहरा क्या खूबसूरत होगा,जब"

लटें नहीं ठहरी,कोई तिल नहीं ठहरा।

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