दिलनशीं
#दिल की बात मैं, दिलनशीं से कैसे कहता।
ये उसी की बात थी,उसी से कैसे कहता।
जो भी जानता तुम्हें,तुमसे मोहब्बत कर बैठता;
तुमसे मोहब्बत हैं,हर किसी से कैसे कहता।
मेरी नज़र यहां दोस्त,शहर की रानी पर हैं;
उससे शादी करनी हैं,मुफलिशी से कैसे कहता।
मां ने दिखाए हैं हाथ मेरे,शादी में क्या अर्चन हैं;
अर्चना से करनी हैं शादी,ज्योतिषी से कैसे कहता।
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