चाहता हूँ।
ख़ुद को हार जाए, ग़र मैं जीतना चाहता हुँ।
यहाँ किसी का होना,दोस्त"मैं इतना चाहता हुँ।
फ़िर वही सवाल,उसी जि़द पर आ गए तुम;
किस तरह बताऊँ,मैं तुम्हें कितना चाहता हुँ।
कुछ फ़रेब दिल मे भी होंगे,तुम्हें कैसे रखते;
रखना तुम्हें दिल मे नहीं,बनाना ख़ुदा चाहता हुँ।
तुम हँसती हुई,सनम"बहुत सुंदर दिखती हो;
बस हंसती रहना,भला"और मैं क्या चाहता हुँ।
सबके हिस्से में नहीं आते,जन्नत के मंज़र;
परियों की शोहबत मिलें,मैं ये कहाँ चाहता हुँ।
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