आसरा

 जो लुट चुके हैं उनका भी हो" आसरा कोई ।

अब हमारी जिंदगी में,आ गया है तीसरा कोई।


ए ख़ुदा सबकी मोहब्बत को,ऐसा अंजाम दें;

बिछड़े नहीं,जब किसी का हो इक दफा कोई।


मिलें गर हम तो सनम,कुछ इस तरह रहेंगे;

जैसे इक ही धागे के हो,हम- तुम सिरा कोई।


वो भी आबाद रहें, ख़ुदा"जिन्होंने दिल तोड़ा हैं;

चाहकर नहीं होता हैं,दोस्त"यहां बेवफ़ा कोई।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान