गैरजरूरी
एहतियातन गैरजरूरी थे हम।
उनके लिए बस मजबूरी थे हम।
फिर भी"वो यूं साथ निभातें रहें;
जैसे बेफिजूल थे,जरूरी थे हम।
मेरे बाद उनमें भी वो खनक न थी;
कभी उनकी कलाई के चूड़ी थे हम।
मिलने वालों के,नज़रिए में फर्क था;
कहीं फूल थे,और कहीं छुरी थे हम।
एहतियातन गैरजरूरी थे हम।
उनके लिए बस मजबूरी थे हम।
फिर भी"वो यूं साथ निभातें रहें;
जैसे बेफिजूल थे,जरूरी थे हम।
मेरे बाद उनमें भी वो खनक न थी;
कभी उनकी कलाई के चूड़ी थे हम।
मिलने वालों के,नज़रिए में फर्क था;
कहीं फूल थे,और कहीं छुरी थे हम।
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