लरके

 समंदर चाहकर भी,हाथों से न"उठाए जातें हैं।

लड़के छोड़े नहीं जाते,बस ठुकराए जातें हैं!


अक्सर जिनके पैरों तलें,फूल कुचलें जाते हैं;

उन्हीं को पाने की ख़ातिर,अकुलाएं जाते हैं।


जो बंदा दिल से किसी का, होकर रहता हैं।

वही मूर्ख उनकी महफ़िल में,बताए जातें हैं।


भला कोई बेहया, मुझें क्या नुकसान करती;

ये तो हया हैं मेरे,अंदर से"मुझें खाए जाते हैं।

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