बुनियाद

 यकीं मान मैं दिल की बुनियाद हिला देता।

तू मुझको भी,तो"काश महफ़िल में बुला लेता।


या तो तेरी उम्रभर के लिए दोस्त हो ही जाती;

या तो मैं वहां सबकी, आँखों को रुला देता।


चल हट बहुत हुआ,अब कितनी मिन्नत करेगा;

इससे अच्छा मर जाता,या उसको भुला देता।


दुनिया नाचीज़ इस दिल को,कब समझी हैं;

गर तू उसके मज़े लेता,तो"अच्छा सिला देता।

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