अधिकार
ये दिल तो उसी का होकर रहा,
हां! जिस्म पे कई अधिकार हो गए।
नाव ने ही,साथ निभाया नदी का;
लोग नाव सहारे,बस गंगा पार हो गए।
जो रिश्ता निभाता रहा,बेज़ार ही रहा;
दिल छलने वालें,सारे होशियार हो गए।
ये सूट-बूट,ये रुतबा,रईसी दिखती हैं;
हम आदमी से,सजतें हुए व्यापार हो गए।
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