बगावत
जिस तरफ सब हैं,नहीं"उस तरफ नहीं जाना मुझकों।
जो बगावत कर सकें, उसी से हैं रिश्ता बनाना मुझकों।
कोई ग़रीब लड़का,कबतक"जुल्फें संवारता फिरता;
मोहब्बत थी मग़र था,घर के लिए भी कमाना मुझकों।
अपनी हैसियत मुताबिक़,जितना देता,दे दिया था उसे;
ये मोहब्बत कैसी,जो फिर भी"दे रहीं है ताना मुझकों।
बुरे दौड़ में भी वज़ीर थे, अच्छें दौड़ में सोचों क्या होतें;
ज़रा सब्र करतें,तुमने जाना भी,तो" नहीं जाना मुझकों।
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